सहारनपुर में बड़ा राजनीतिक हंगामा! थाना सदर बाजार में धरने पर बैठीं सपा सांसद इकरा हसन, बोलीं—"न्याय मांगना जुर्म है तो मुझे भी जेल भेजो
सहारनपुर में बड़ा राजनीतिक हंगामा! थाना सदर बाजार में धरने पर बैठीं सपा सांसद इकरा हसन, बोलीं—"न्याय मांगना जुर्म है तो मुझे भी जेल भेजो"
उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में उस समय भारी राजनीतिक सरगर्मी और हंगामा देखने को मिला, जब कैराना लोकसभा सीट से समाजवादी पार्टी की तेजतर्रार सांसद इकरा हसन अचानक थाना सदर बाजार पहुंच गईं। एक पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने और पुलिसिया कार्रवाई के विरोध में सांसद थाने के भीतर ही धरने पर बैठ गईं। सांसद के धरने पर बैठते ही पुलिस महकमे के आला अधिकारियों के हाथ-पांव फूल गए और देखते ही देखते थाने के बाहर समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं और समर्थकों की भारी भीड़ जमा हो गई। घंटों तक चले इस हाई-वोल्टेज ड्रामे के दौरान सांसद ने पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाए। अब यह पूरा मामला पश्चिमी उत्तर प्रदेश सहित पूरे प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा चर्चा का विषय बन गया है। आइए समझते हैं कि आखिर क्या है इस पूरे बवाल की अंदरूनी कहानी।
थाने के भीतर हाई-वोल्टेज ड्रामा: फर्श पर बैठीं सांसद
मिली जानकारी के अनुसार, मामला एक स्थानीय पीड़ित परिवार से जुड़ा हुआ है, जो पिछले कई दिनों से न्याय के लिए पुलिस के चक्कर काट रहा था। पीड़ित परिवार का आरोप था कि शिकायत के बावजूद थाना सदर बाजार पुलिस उनकी सुनवाई नहीं कर रही थी और आरोपियों को शह दी जा रही थी। जब यह बात कैराना सांसद इकरा हसन तक पहुँची, तो वह खुद मामले की पैरवी करने थाने पहुंच गईं।
थाने में मौजूद अधिकारियों से बातचीत के दौरान जब सांसद को लगा कि पुलिस प्रशासन टालमटोल कर रहा है, तो उन्होंने कड़ा रुख अपना लिया। इकरा हसन बिना किसी हिचकिचाहट के थाने के भीतर ही फर्श पर धरने पर बैठ गईं। उन्होंने साफ कह दिया कि जब तक पीड़ित परिवार की एफआईआर (FIR) दर्ज कर आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होती, वह थाने से टस से मस नहीं होंगी।
"अगर न्याय मांगना जुर्म है, तो मुझे भी जेल भेजो"
धरने के दौरान जब पुलिस अधिकारियों ने सांसद को समझाने और धरना खत्म करने का आग्रह किया, तो इकरा हसन का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने पुलिसिया तंत्र पर सीधा प्रहार करते हुए गरजते हुए कहा, "अगर इस प्रदेश में एक गरीब और पीड़ित परिवार के लिए न्याय मांगना जुर्म बन चुका है, तो कानून की धज्जियां उड़ाने वाले अफसरों को खुला छोड़ने के बजाय मुझे भी जेल भेज दीजिए। हम डरने वाले नहीं हैं, जनता के हक की लड़ाई सड़क से लेकर संसद तक लड़ी जाएगी।"
सांसद के इस कड़े तेवर ने पुलिस अधिकारियों को बैकफुट पर ला दिया। इसी बीच सोशल मीडिया पर उनके धरने की तस्वीरें और वीडियो आग की तरह वायरल हो गए, जिसके बाद सहारनपुर और शामली जिले से भारी संख्या में सपा नेता और कार्यकर्ता सदर बाजार थाने की तरफ कूच करने लगे। स्थिति को बिगड़ता देख पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी और भारी पुलिस बल तैनात कर दिया।
अधिकारियों के आश्वासन के बाद शांत हुआ मामला
थाने के बाहर बढ़ते तनाव और राजनीतिक दबाव को देखते हुए जिले के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी (सीओ और एडिशनल एसपी) मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने सांसद इकरा हसन के सामने पीड़ित परिवार की शिकायत पर तुरंत निष्पक्ष जांच करने, आरोपियों के खिलाफ कड़ी धाराओं में मुकदमा दर्ज करने और दोषी पुलिसकर्मियों की भूमिका की जांच करने का लिखित और मौखिक आश्वासन दिया।
वरिष्ठ अधिकारियों के इस ठोस भरोसे और कार्रवाई के आश्वासन के बाद कई घंटों से चल रहा यह हाई-वोल्टेज ड्रामा आखिरकार शांत हुआ और सांसद ने अपना धरना समाप्त किया। हालांकि, इकरा हसन ने जाते-जाते पुलिस को चेतावनी दी है कि अगर 24 घंटे के भीतर ज़मीनी स्तर पर कार्रवाई नहीं दिखी, तो यह आंदोलन और बड़ा रूप लेगा।
निष्कर्ष
सहारनपुर थाना सदर बाजार की यह घटना यह साफ दर्शाती है कि उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था और विपक्ष की सक्रियता को लेकर राजनीतिक पारा कितना गर्म है। एक सांसद का सीधे थाने के भीतर धरने पर बैठ जाना पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है कि आखिर आम जनता को न्याय के लिए देश के जनप्रतिनिधियों को इस तरह सड़कों या थानों में क्यों बैठना पड़ रहा है। इस घटना ने एक बार फिर इकरा हसन को पश्चिमी यूपी की राजनीति के केंद्र में ला खड़ा किया है।
सहारनपुर के इस पूरे राजनीतिक ड्रामे और सांसद इकरा हसन के इस कड़े कदम पर आपकी क्या राय है? क्या पुलिस को बिना किसी राजनीतिक दबाव के ही आम जनता की सुनवाई करनी चाहिए? अपने विचार नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर साझा करें।
Comments
Post a Comment